जब कपिल देव की टीम ने उलट दी दुनिया
आज से 22 साल पहले आज ही के दिन भारतीय क्रिकेट टीम ने कपिल देव के नेतृत्व में ऐसी बुलंदी छुई जिसने सभी भारतीयों की दिलों की धड़कनों के तार जोड़ दिए।
25 जून, 1983 को कप्तान कपिल देव की टीम ने दुनिया की सबसे ताकतवर मानी जाने वाली वेस्टइंडीज टीम को लार्ड्स पर 43 रनों से पटखनी दी।
1983 की जीत के अहसास आज के बच्चे और युवा पीढ़ी का सबक बन गया। पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनने का नशा फैंस के जेहन में अब भी बरकरार है। कुछ तो बात है उस जीत में जिसका खुमार आज भी कायम है।
टीम इंडिया ने लगातार दो बार चैंपियन रह चुकी कप्तान क्लाइव लॉयड की धुरंधर टीम के सामने सिर्फ 183 का स्कोर खड़ा किया था। कैरीबियन टीम के पास गॉर्डन ग्रीनिज, डेसमंड हेन्स, बेहद खतरनाक सर विवियन रिचर्ड्स, कप्तान क्लाइव लॉयड, लैरी गोम्स, फाउ बैकस, जेफडू जोन, मैल्कम मार्शल, एंडी रॉबर्ट्स, जोएल गार्नर और माइकल होल्डिंग जैसे खिलाड़ी थे। 183 का स्कोर उस टीम के लिए बचकाना था लेकिन इंडिया टीम ने सबको सन्न कर दिया।
कपिल ने दिया था जीत का मंत्र
इनिंग्स ब्रेक के दौरान कपिल टीम के जनरल बन गए। हरियाणा हरिकेन ने कप्तान की ज़ुबान में अपनी टीम से कहा, इतने रन जीत के लिए काफी ना सही, लडऩे के लिए जरूर काफी हैं।
गावसकर कहते हैं कि अगर आप 183 के स्कोर के सामने विंडीज की बैटिंग लाइन अप देखें तो लगता है कि ये सब उनके लिए एक पार्क में टहलने जैसा ही स्कोर था।
कई बार यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि आप वर्ल्ड चैंपियन टीम का हिस्सा थे। लेकिन ऐसा नहीं है कि टीम इंडिया पर दुनिया में किसी जानकार को भरोसा नहीं था।
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